बॉडी लैंग्वेज इन हिंदी

संचार , निस्संदेह हमारे सामाजिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक दूसरे से वार्तालाप , सिर्फ बोलने और लिखने के माध्यम से हो ऐसा जरूरी नहीं है ।


मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हैं क्यूंकि मनुष्य, विभिन्न स्थितियों और वार्तालापों के लिए, बोलने के साथ -साथ, अपने शरीर द्वारा भी प्रतिक्रिया करता है । बॉडी लैंग्वेज गैर-मौखिक संचार एक रूप है, जो मौखिक और लिखित संचार जितना ही महत्वपूर्ण है।


यह लेख सरल शारीरिक भावों को व्याख्या एवं अर्थ प्रदान करने का प्रयास करता है

Regard : Omkar Dahibavkar

1. आँख से संपर्क बनाए रखना :

यह हम सभी जानते है कि , बोलते समय, आंखों का संपर्क बनाए रखना आत्मविश्वास और शिष्टाचार का संकेत है। परन्तु यह, निश्चित रूप से, सकारात्मक या नकारात्मक भावना ,दोनों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।


सकारात्मक रूप से आंखों का संपर्क, सिर्फ आत्मविश्वास का प्रदर्शन है, इसका कोई और मकसद नहीं है। दूसरी ओर, आंखों के संपर्क का नकारात्मक उपयोग, एक गलत मकसद से जुड़ा हुआ है। ऐसा, आमतौर पर, दूसरे व्यक्ति को हेरफेर करने या धोखा देने के लिए किया जाता है।


कुछ मामलों में, आंख का संपर्क मिलाकर, नहीं बोलने का एक संकेत यह भी है ,कि सामने वाला व्यक्ति झूठ बोल रहा है।

2. सिर की गतिविधि का निरीक्षण करें :

जिस समय आप बोल रहे हैं, उस समय सामने वाले के सिर की गतिविधि का निरिक्षण करने से आपको उनके धैर्य का संकेत मिलता है। धीमी गति से सिर घूमना इंगित करता है कि, वह सामने वाला व्यक्ति, जो आप कह रहे है, उसमें रुचि रखता है और चाहता है कि आप बातचीत जारी रखें।


वहीँ सिर को तेज -तेज हिलना ,यह इंगित करता है कि , व्यक्ति ने आपकी बात को पर्याप्त सुन लिया है और चाहता है कि आप बोलना समाप्त कर दें या उसे बोलने के लिए मौका दें ।



3. बोलते समय कपड़ों के साथ उलझना :

एक व्यक्ति जो वार्तालाप करते समय अपनी पोशाक के साथ छेड़छाड़ कर रहा है, इसका संकेत है कि वह बाहरी रूप से घबराहट दिखा रहा है। यह आमतौर पर तब होता है जब व्यक्ति अपने पहने हुए कपड़ों में खुद को असहज महसूस करता है, लेकिन ऐसा सभी मामलों में नहीं होता ।

4. हाथ मोड़ना और पैर हिलना :

मुड़े हुए हाथ और पैरों को हिलना भी आमतौर पर कमजोर विचारों का संकेत है। ऐसा, कोई व्यक्ति तब करता है जब उसे किसी अन्य व्यक्ति के सामने अपने भावों को जाहिर की इच्छा नहीं होती है।


ऐसा करना, झूठ बोलते समय ही जरूरी नहीं है, क्योंकि यहाँ एक ऐसी स्थिति हो सकती है, जहां व्यक्ति, आहत करने या उकसाने वाले शब्दों से बच रहा हो। दूसरी ओर, पैर हिलाना, आमतौर पर अधीरता या घबराहट या दोनों की ओर इशारा करता है।


सूचना और प्रतिक्रिया का संचरण, संचार का चक्र बनाता है। हम सभी ,अपने शरीर के माध्यम से बोलते और सुनते हैं। यदि बॉडी लैंग्वेज को सही ढंग से पढ़ा जाए, तो यह मौखिक और लिखित संचार के रूप के जैसे ही अच्छा है।


विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को एक सफल कैरियर के लिए, इस कला को सीखने की आवश्यकता है।


हमें यह भी सीखना चाहिए कि, अपने निजी जीवन को बेहतर बनाने के लिए, बॉडी लैंग्वेज को कैसे समझा और सीखा जाए। यदि लोग एक-दूसरे की बॉडी लैंग्वेज पढ़ने में सक्षम हैं, तो झगड़े और बहस से बचा जा सकता है।